जिस रघुराम राजन को ठुकाराया, उसी से जोशी हेल्प मांग रहे हैं

नरेंद्र मोदी सरकार के लिए इससे बड़ी शर्मिंदगी बात क्या हो सकती है। गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) संकट से दम तोड़ती भारत की बैंकिंग प्रणाली को सुधारने के लिए संसद की अनुमान समिति के प्रमुख मुरली मनोहर जोशी पूर्व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) गवर्नर रघुराम राजन का दरवाजा खटखटाया है। यह सर्वविदित है कि बड़े कॉर्पोरेट द्वारा किए गए बुरे ऋणों से निपटने के लिए राजन के आक्रामक दृष्टिकोण का कॉर्पोरेट लॉबी ने कितना विरोध किया था। बल्कि राजन ने तो दीवालिया होने की संभावनाओं और गंभीर स्‍थ‌ितियों के लिए ऐसे लोगों की निजी संपत्तियों को भी उनके खातों से संबद्ध करने का दवाब बनाया था।

बीते 7 अगस्त (मंगलवार) को रघुराम राजन को संसदीय समिति के चेयरमैन जोशी के हस्ताक्षर वाला लेटर भेजा गया था, जो द वायर के हाथ लगा। समिति ने पिछले ही महीने पूर्व मुख्य आर्थ‌िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम का बयान दर्ज किया था। तब पूर्व मुख्य आर्थ‌िक सलाहकार ने कहा था, डॉ. राजन का धन्यवाद करना चाहिए कि उन्होंने एनपीए के संकट को ना केवल पहचाना बल्कि उन्होंने इसके निपटारे के लिए कोशिश की।

यह अलग की बात है कि मोदी सरकार द्वारा राजन के कार्यकाल को नहीं बढ़ाया गया, जबकि ऐसा किया जा सकता था। जबकि अरविंद स्वामी ने हाल ही में अपनी सेवाएं बंद कीं। दोनों आर्थ‌िक विशेषज्ञ को हटाने के लिए बीजेपी का एक बड़ा हिस्सा लंबे समय से अभियान चला रहा था। हालात यहां तक बिगड़े थे कि राजन और सुब्रमण्यम दोनों ही आर्थ‌िक जानकारों को अपनी चिंताएं आम लोगों के सामने आकर प्रकट करनी पड़ी थीं।

ऐसे में जब उनके सलाह की मोदी सरकार को सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी वक्त मोदी सरकार ने उन्हें जाने दिया। राजन इस वक्त शिकागो के एक बिजनेस स्कूल में प्रोफेसर की सेवाएं दे रहे हैं। जबकि अरविंद सुब्रमण्यम भी अमेरिकी शिक्षण संस्‍‌थानों में वापसी की तैयारी में हैं।

संसद में एनपीए संकट की समीक्षा के लिए बनाई गई अनुमान समित‌ि के प्रमुख जोशी ने राजन को जो लेटर भेजा है, उसमें लिखा है- समित‌ि उनके अनुभवों और जानकारी का लाभ चाहती है। अगर किसी कारणवश वे समिति से मुखातिब नहीं हो सकते तो वे अपनी विशेषज्ञ राय लिखित तौर पर समिति को भेज सकते हैं।

पिछले महीने ही जब सुब्रमण्यम को समिति के सामने समन किया गया था तब भी मोदी सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। राजन, जिनका मोदी सरकार ने आरबीआई के गवर्नर के तौर पर कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया, जिनके स्पष्ट विचारों से मोदी सरकार असहज हुई थी।

रघुराम राजन ने अपने अंतिम दिनों में कहा था कि नोटबंदी का फैसला सोच-समझ कर लिया गया फैसला नहीं था। इससे काला धन पर कोई असर नहीं पड़ा। लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्‍था को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी और 2जी स्कैम की विस्तृत समीक्षा के लिए बनी सार्वजनिक लेखा समिति के चेयरमैन रहे थे। हालांकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के सबसे बड़े घोटाले को साबित करने में मोदी सरकार विफल रही थी। जज ने मामले के आरोपियों को सबूत ना होने के बिनाह पर बरी कर दिया था।

जोशी ने इससे पहले वित्त सचिव हसमुख अधिया को भी जांच का हिस्सा बनाया था। आरबीआई के अधिकारी, बल्कि पूरा वित्त मंत्रालय, सत्ता पक्ष, सुब्रमण्यम और राजन के बयान के बाद एक बार फिर शर्मिंदगी का शिकार हो सकता है।

अब जब आम चुनावों में आठ महीने रह गए हैं। ऐसे में एनपीए पर मोदी सरकार का इस तरह से घिरना ना केवल वित्त मंत्री अरुण जेटली बल्कि बिना किसी पोर्टफोलियो के वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल के लिए कठिन समय है। जबकि विपक्ष लगातार एनपीए के मुद्दे पर मुखर है।

Facebook Comments