जानिए रामायण में कुंभकरण 6 महीने तक क्यों सोता रहता था

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आप सभी ने रामायण के अंदर देखा होगा कि भगवान राम कुंभकरण का वध किया था. कुंभकरण बहुत शक्तिशाली राक्षस था. कुंभकरण ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया था. ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर वह ब्रह्मा जी से इंद्रासन को वरदान के रूप में पाना चाहता था. इस बात का सभी देवताओं को मालूम चलने पर वह बुरी तरह से घबरा गए. उन्होंने सोचा यदि कुंभकरण इंद्रासन हासिल कर लेगा तो सृष्टि से धर्म का नाश हो जाएगा. इसी समस्या को लेकर सभी देवता ब्रह्मा जी के पास गए. सभी देवताओं ने ब्रह्मा जी से विनती करी कि कुंभकरण को ऐसा वरदान ना दें. उस समय ब्रह्मा जी ने देवताओं को कहा प्रकृति का एक नियम है. जो व्यक्ति मेहनत करता है उसको उसका फल देना ही होता है. यदि तुम्हें इस समस्या का समाधान चाहिए तो देवी सरस्वती के पास जाओ. सभी देवता देवी सरस्वती के पास गए और उन्होंने अपनी समस्या बताई. देवी सरस्वती ने कहा मैं तुम्हारी समस्या का निवारण करूंगी. जब ब्रह्माजी कुंभकरण को वरदान देने के लिए गए तो देवी सरस्वती कुंभकरण की जिवाह पर बैठ गई.

ब्रह्मा जी ने कुंभकरण से कहा बोलो क्या वरदान मांगते हो. कुंभकर्ण ने इंद्रासन बोलने की जगह निद्रासन बोल दिया. जब कुंभकरण ने निद्रासन का वरदान मांगा तो ब्रह्मा जी ने तथास्तु कहकर उसे वरदान दे दिया. इसके बाद कुंभकरण और उसकी भाई बड़ी चिंता में पड़ गए. तब उन्होंने ब्रह्मा जी से विनती करी कि इस वरदान को वापस लें. तब ब्रह्मा जी ने कहा मैं वरदान तो वापस नहीं ले सकता. लेकिन कुंभकरण को 6 महीने में एक बार जगने का अवसर देता हूं. यही कारण था कि कुंभकर्ण साल में 6 महीने सोता रहता था और 6 महीने मे1 दिन के लिए जगता था.

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