रामायण की सबसे महत्वपूर्ण घटना, मौजूद हैं निशानियां….

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास बसा पंचवटी रामायण से जुड़ी एक बहुत ही खास जगह है। रावण ने देवी सीता का हरण पंचवटी से ही किया था। इसी वजह से इस जगह को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

आज हम आपको बताने जा रहे हैं पंचवटी से जुड़ी ऐसी 8 बातें, जो इसे और भी खास बनाती हैं-

इसलिए कहा जाता है इसे पंचवटी

इस जगह का नाम पंचवटी होने के पीछे एक खास कारण माना जाता है। कहते है इस जगह पर वट के पांच पेड़ थे, जिसके कारण इस जगह को पंचवटी कहा जाता है।

 

यहीं काटी थी लक्ष्मण ने शूर्पनखा की नाक

ग्रंथों के अनुसार, रावण की बहन शूर्पनखा ने इसी जगह पर राम-लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था और देवी सीता को मारने की कोशिश की थी। फलस्वरूप लक्ष्मण ने यहीं पर शूर्पनखा की नाक काट दी थी। इसी बात का बदला लेने के लिए रावण ने सीता का हरण कर लिया था।

 

इसलिए पड़ा इस जगह का नाम नासिक

इस क्षेत्र का नाम नासिक पड़ने के पीछे का कारण भी यहां घटी घटना ही मानी जाती है। इसी क्षेत्र में लक्ष्मण द्वारा शूर्पनखा की नासिका यानी नाक काटे जाने की वजह से यह क्षेत्र नासिक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

 

ऐसा मंदिर जहां साल के एक दिन पड़ती हैं भगवान के चरणों पर सूर्य की किरणें

पंटवती में सुंदर नारायण नाम का एक मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में काले रंग की तीन मूर्तियां हैं, जिसमें बीच में भगवान नारायण और उके आस-पास देवी लक्ष्मी की मूर्तियां हैं। यह मंदिर अपनेआप में ही खास है क्योंकि इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह किया गया है कि हर साल 20 या 21 मार्च को मूर्तियों के चरणों पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं।

 

वे जगह जहां देवी सीता करती थीं आराम

पंचवटी में सुंदर-नारायण मंदिर से कुछ दूरी पर ही सीता गुफा है, जिसमें भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियां हैं। कहते हैं कि दडकारण्य क्षेत्र से गुजरने के दौरान देवी सीता इसी गुफा में ठहरी थीं।

खास है यहां का कालेराम मंदिर

पंचवटी के मंदिरों में कालेराम नामक मंदिर प्रमुख मंदिर माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जह श्रीराम पंचवटी आए थे, तब उन्होंने इसी जगह पर आराम किया था। मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की काले रंग की मूर्तियां स्थापित हैं।

 

वे जगह जहां श्रीराम ने किया था जटायु का अंतिम संस्कार

पंचवटी से कुछ कि.मी. की दूरी पर जंगल में वो जगह है, जहां पर भगवान राम ने जटायु का अंतिम संस्कार किया था। यहीं पर श्रीराम ने जटायु के तर्पण के लिए बाण मारकर धरती से जल निकाला था, जिसे सर्वतीर्थ कुंड कहा जाता है।

 

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल

पंचवटी से लगभग 30 कि.मी. की दूरी पर ब्रह्मगिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम स्थन माना जाता है। गोदावरी नदी का वर्णन कई धर्म-ग्रंथों में पाया जाता है।

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