साध्वियों को हुआ सामूहिक बलात्कार सामने आई ये बड़ी चाजें

उन्होंने आगे बताया कि पीड़िता और आरोपियों से हुई पूछताछ के बाद दोनों ही साध्वियों ने 164 के बयान में झूठी रिपोर्ट लिखाना स्वीकार कर लिया है.

 

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के पेंड्रा इलाके में दो साध्वियों के साथ हुए गैंगरेप का मामला फर्जी निकला. हप्तेभर पहले दो साध्वियों ने मुख्यमंत्री रमन सिंह को गैंगरेप से पीड़ित बताकर न्याय की मांग की थी. मुख्यमंत्री रमन सिंह ने दोनों साध्वियों की गुहार सुनने के बाद गैंगरेप का मामला दर्ज करने के निर्देश पुलिस को दिए थे. घटना के करीब साढ़े तीन महीने बाद पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर उनकी धर पकड़ शुरू की. पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों ने जब हकीकत बयां की तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई.

पुलिस ने आरोपियों और गैंगरेप पीड़ित दोनों साध्वियों का आमना सामना कराया. इस दौरान खुलासा हुआ कि दोनों साध्वियों ने अपने गुरु के कहने पर उनके विरोधी चेलों के खिलाफ साजिश कर गैंगरेप का मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए. पूरा मामला उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले स्थित बाबा सच्चिदानंद के संतकुटी आश्रम के मालिकाना हक़ को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है. दोनों साध्वियों ने झूठी रिपोर्ट लिखाने की बात स्वीकार कर ली है. इसके बाद पुलिस ने उनका CRPC एक्ट की धारा 164 के तहत बयान दर्ज किया. अब पुलिस दोनों ही साध्वियों के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखाने और आपराधिक साजिश  रचने की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी में है.

दरअसल, बाबा सच्चिदानंद के खिलाफ आरोपी दिलचंद की बेटी ने बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था. यह प्रकरण उत्तरप्रदेश के बस्ती जिले में पंजीबद्ध हुआ था. बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख के मुताबिक बाबा सच्चिदानंद ने उनके खिलाफ बलात्कार का प्रकरण दर्ज कराने वाली पीड़ित लड़की के पिता दिलचंद पटेल को बलात्कार के मामले में झूठा फंसाने के निर्देश अपनी दोनों साध्वियों को दिए थे. उन्होंने बताया कि अपने गुरु के निर्देश का पालन करते हुए दोनों ही साध्वियों ने अपनी हत्या किए जाने की सुपारी लेने और गैंगरेप की कहानी गढ़ी. इसके बाद जांजगीर चांपा जिले की सरहद पर स्थित सोन नदी के सुनसान इलाके में पहुंची, फिर वहां से स्थानीय लोगों की सहायता लेकर पेंड्रा थाने में गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज कराई.

एसपी आरिफ शेख ने बताया कि पुलिस ने गैंगरेप की घटना की तीन माह से भी ज्यादा समय तक विवेचना की,लेकिन पीड़ित साध्वियों के बयान, घटना के साक्ष्य, पीड़िता और आरोपियों की आवाजाही के प्रमाण कुछ भी स्थापित नहीं हो पाए. इसके चलते पुलिस ने गैंगरेप का प्रकरण दर्ज नहीं किया था. बाद में मिले निर्देश के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की तह में जाने की ठान ली थी, उनके मुताबिक बाबा सच्चिदानंद ने अपने ऊपर दर्ज बलात्कार की घटना को काउंटर करने के लिए पीड़ित लड़की के पिता पर झूठा प्रकरण दर्ज कराया था. उन्होंने बताया कि साध्वियों ने दो लाख की सुपारी देकर उनकी हत्या कराए जाने के आरोप लगाए थे. इस तथ्य की जब जांच हुई, तब पता चला कि आरोपी दिलचंद  की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि वो दोनों साध्वियों की हत्या के लिए दो लाख की सुपारी देने के काबिल हो. उन्होंने आगे बताया कि पीड़िता और आरोपियों से हुई पूछताछ के बाद दोनों ही साध्वियों ने 164 के बयान में झूठी रिपोर्ट लिखाना स्वीकार कर लिया है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पेंड्रा थाने में 15 जून 2018 को दो साध्वियों के साथ गैंगरेप की घटना दर्ज होने के बाद हड़कंप मच गया था. पीड़ित साध्वियों के मुताबिक 25 मार्च 2018 की देर शाम उनके साथ आठ लोगों ने बारी-बारी से बलात्कार किया. बलात्कारियों में से एक दिलचंद ने मौके पर मौजूद दूसरे शख्स को दोनों ही साध्वियों की हत्या के लिए दो लाख रूपये की सुपारी देने की पेशकश भी की थी.

साध्वियों ने पुलिस को यह भी बताया था कि इस शख्स ने रुपये लेकर उन्हें मौत के घाट नहीं उतारा, बल्कि छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश छोड़ देश के किसी भी हिस्से में जाने की हिदायत दी थी. साध्वियों की रिपोर्ट पर पुलिस ने जांजगीर निवासी दिलचंद पटेल, यूपी निवासी कल्पनाथ चौधरी, गिरजाशंकर चौधरी, श्यामनंद चौधरी उर्फ़ तपस्यानंद व अन्य चार आरोपियों के खिलाफ धारा 366, 367 के तहत जुर्म दर्ज किया था. बिलासपुर की एएसपी मधुलिका सिंह के मुताबिक इस  गैंगरेप के मामले को ख़ारिज के लिए अदालत भेजा जाएगा, ताकि झूठे मामले में आरोपी बनाए गए लोगों को राहत मिल सके.

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