आज लगेगा सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण, दोपहर के बाद बंद हो जाएंगे देश के सभी बड़े मंदिर

आज 27 जुलाई को सदियों तक याद रखा जाएगा। इस दिन दुनिया सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण देखेगी जो एक घंटा 45 मिनट तक रहेगा। यह दिन खगोलशास्त्रियों के लिए भी खास होने जा रहा है।

21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण (Longest total lunar eclipse) आज यानी 27 जुलाई को लग रहा है। चंद्रग्रहण के कारण ही देशभर के कई बड़े मंदिर दोपहर बाद ही बंद हो जाएंगे। हरिद्वार, वाराणसी और इलाहाबाद में हर शाम होने वाली गंगा आरती भी दोपहर को होगी। बदरीनाथ और केदारनाथ मन्दिर के कपाट शुक्रवार दोपहर से शनिवार सुबह तक बन्द रहेंगे। ऐसा चंद्रग्रहण के कारण हो रहा है।

आज दुनियाभर की निगाहें चंद्रग्रहण पर टिकी हैं। भारत में पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। देशभर के कई इलाके में पूर्ण चंद्रग्रहण को देखने के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं। बताया जा रहा है कि भारत में चंद्रग्रहण का असर देर रात 10.53 बजे से ही दिखना शुरू हो जाएगा। धीरे-धीरे चांद का रंग लाल होता जाएगा और एक समय ऐसा आएगा जब चांद पूरी तरह से गायब हो जाएगा।

यह एक ऐसी घटना है जब दुनियाभर के स्टार गैजर को खून जैसे लाल चंद्रमा को देखने का मौका मिलेगा। ऐसा तब होता है जब चंद्रमा पूरी तरह से ग्रहण में होता है और सूरज की रोशनी के कारण लाल दिखाई देने लगता है। 27 जुलाई की रात में लगने जा रहे इस खगोलीय घटना में करीब चार घंटे तक चन्द्रमा इस ग्रहण के प्रभाव में रहेगा। इस दिन मंगल भी पृथ्वी के काफी करीब आने वाला है। चंद्र ग्रहण को लेकर पूरे देश के खगोलशास्त्री काफी उत्साहित हैं।

अस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कूल ऑफ एस्ट्रोनोमी और एस्ट्रेफिजिक्स के एस्ट्रोनोमर ब्रैड टकर ने बताया कि चंद्रमा हमेशा सूर्य और पृथ्वी के साथ पूर्ण संरेखण में नहीं होता है इसलिए हमें हर चांज चक्र में हमें चंद्र ग्रहण देखने को नहीं मिलता है। यह चंद्र ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि यह पूरी दुनिया में दिखाई देगा सिर्फ उत्तरी अमेरिका को छोड़कर।

लेकिन यह सबसे खूबसूरत और अच्छा दिखेगा अस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, अफ्रीका और एशिया में। इस साल यह दूसरा मौका होगा जब ग्रहण के समय ब्लड मून दिखेगा। उन्होंने आगे कहा कि हम देखते हैं कि सूर्य चंद्रमा 35000 किलोमीटर दूर रहने के बाद भी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय चंद्रमा की सतह को रोशनी देता है। अगर आप चंद्रमा पर हैं तो आपको सूर्य ग्रहण देखने का मौका मिलता है जब पृथ्वी सूर्य के सीध में आता है और वह पूरी तरह से ढक जाता है।

चंद्र ग्रहण क्यों होता है?

इसका सीधा सा जवाब है कि चंद्रमा का पृथ्वी की ओट में आ जाना। उस स्थिति में सूर्य एक तरफ, चंद्रमा दूसरी तरफ और पृथ्वी बीच में होती है। जब चंद्रमा धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है।

चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है

चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता है। इसका कारण है कि पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुके होना। यह झुकाव तकरीबन 5 डिग्री है इसलिए हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता। उसके ऊपर या नीचे से निकल जाता है। यही बात सूर्यग्रहण के लिए भी सच है।

सूर्यग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होते हैं क्योंकि चंद्रमा का आकार पृथ्वी के आकार के मुकाबले लगभग 4 गुना कम है। इसकी छाया पृथ्वी पर छोटी आकार की पड़ती है इसीलिए पूर्णता की स्थिति में सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है। लेकिन चंद्र ग्रहण की स्थिति में धरती की छाया चंद्रमा के मुकाबले काफी बड़ी होती है। लिहाजा इससे गुजरने में चंद्रमा को ज्यादा वक्त लगता है।

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