श्याम रजक ने घेरा रामविलास पासवान को, बोले – 8 अगस्त को मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दें

जदयू के बड़े नेता श्याम रजक तेवर में आ गए हैं . मुद्दा दलितों का है . सीधा टारगेट किया है रामविलास पासवान को . बोले हैं, दिखावा न करें रामविलास पासवान . न माया मिली – न राम वाली स्थिति में न फंसें . दलित कानून को शिथिल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को रोकने को नरेंद्र मोदी सरकार आर्डिनेंस लाए . जस्टिस ए के गोयल को एनजीटी के चेयरमैन पद से डिसमिस करे . दोनों काम नहीं होते हैं, तो रामविलास पासवान को इस्तीफा देकर कैबिनेट से बाहर आ जाना चाहिए . पूरे देश का दलित साथ होगा, नहीं तो भुगतेंगे .

लाइव सिटीज से खास बातचीत में श्याम रजक बोले, रामविलास पासवान की अब तक की चाल दलितों को दिग्भ्रमित करने वाली रही है . 22 दिनों तक चुप रहे . जब 2 अप्रैल को पूरे देश में दलित सड़कों पर थे,अभूतपूर्व भारत बंद था,तब रामविलास पासवान क्या कर रहे थे, सबों को पता था . अब देश भर के दलित जागृत हैं . वे अपने हक़ के लिए मरने-मारने की स्थिति में आ गए हैं .

श्याम रजक ने कहा – मेरे लिए दलितों का मुद्दा सर्वोपरि है . बाबा साहब सब कुछ हैं . इसके लिए सब कुछ कुर्बान . जदयू का आखिरी स्टैंड क्या होगा,वे नहीं जानते,पर दलितों की हर लड़ाई में वे सबसे आगे होंगे . देश में दलितों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है . सुप्रीम कोर्ट के तुगलकी आदेश के बाद थानों में दलितों को परेशान किया जा रहा है . शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है .

जदयू नेता ने कहा कि बेशक रामविलास पासवान बड़े नेता हैं . पर, बड़े नेता होने-कहलाने मात्र से कुछ नहीं होगा . समाज के लिए कुर्बानी देनी होगी . देश के दलित कुर्बानी मांग रहे हैं . बातें बनाते रहने का वक़्त खत्म हो चुका है . सभी रामविलास पासवान के चाल-चरित्र को समझ रहे हैं .

श्याम रजक ने कहा कि 8 अगस्त की रामविलास पासवान की डेडलाइन बस भभकी साबित नहीं होनी चाहिए . वे 8 अगस्त की रात को फैसला करें . 9 अगस्त की तारीख से रामविलास पासवान को वैसी कैबिनेट में बिलकुल नहीं बैठना चाहिए, जिसने सुप्रीम कोर्ट में लगातार दलितों के खिलाफ फैसला देने वाले जज ए के गोयल को रिटायरमेंट के तुरंत बाद एनजीटी का चेयरमैन बनाकर देश के दलितों को थप्पड़ मारने का काम किया हो .

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