आप भी जानें आखिर ये विशेष राज्य का दर्जा है क्या?

मोदी सरकार के खिलाफ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की ओर से आज अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। टीडीपी आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर यह प्रस्ताव लाई है। हाल ही में टीडीपी इन्हीं मुद्दों के चलते इसी साल मार्च में एनडीए गठबंधन से अलग हो गई थी। विशेष राज्य के दर्ज की मांग केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली, बिहार जैसे राज्यों की पार्टियां भी करती है। अब सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर विशेष राज्य का दर्जा है क्या? तो आइए समझने की कोशिश करते हैं कि विशेष राज्य का दर्जा क्या है औऱ क्यों राज्य सरकार इसकी मांग करती हैं।
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क्या होता है विशेष राज्य का दर्जा
देश के 29 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। 5 राज्य अभी विशेष दर्जे की मांग कर रहे हैं। जिनमें से एक आंध्र प्रदेश भी है। दरअसल किसी राज्य के भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को देखते हुए उसे विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है। विशेष राज्य का दर्जा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। केंद्र  अपने विवेक से उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा देती है। दरअसल ये दर्जा उनको दिया जाता है जो ज्यादा दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हो या जो अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित हो क्योंकि ऐसे राज्य उद्योग और विकास के मामले में पिछड़ जाते हैं। कई बार यह आथिक रूप से भी पिछड़ जाते हैं। इन राज्यों में विकास की रफ्तार और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र विशेष राज्य का दर्जा देती है। विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद सरकार इन राज्यों को विशेष पैकेज सुविधा और टैक्स में कई तरह की राहत देती है ताकि इन क्षेत्रों में निवेशकों की रूचि बढ़ सके और यहां के लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हों। आंध्र प्रदेश का तर्क है कि हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बनने के बाद इसे राजस्व का काफी नुकसान हुआ है।

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विशेष दर्जा के लिए ये हैं शर्तें

  • जनसंख्या का घनत्व काफी कम हो या फिर जनजाति आबादी की संख्या ज्यादा हो।
  • राज्य पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र हों।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़ा हुआ होना चाहिए।
  • प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व काफी कम हो।
  • आर्थिक रूप से भी काफी पिछड़ा हो।

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इन राज्यों को मिला विशेष दर्जा 
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड। बिहार ने भी 2013 में विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की थी। वहीं अब केजरीवाल सरकार भी दिल्ली को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है।

विशेष राज्य का दर्जा मिले के फायदे

  • केंद्र सरकार से 90 फीसदी अनुदान मिलता है। इसका मतलब केंद्र से जो फंडिंग की जाती है उसमें 90 फीसदी अनुदान के तौर पर मिलती है और बाकी 10 फीसदी रकम बिना किसी ब्याज के मिलती है।
  • जिन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है उन्हें केवल 30 फीसदी राशि अनुदान के रूप में मिलती है जबकि 70 फीसदी रकम उनपर केंद्र का कर्ज होता है।
  • एक्साइज, कस्टम, कॉर्पोरेट, इनकम टैक्स में भी राहत मिलती है।
  • केंद्र सरकार हर साल प्लान्ड बजट बनाती है।
  • प्लान्ड बजट में से 30 फीसदी रकम विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलता है। अगर विशेष राज्य जारी बजट को खर्च नहीं कर पाती है तो पैसा अगले वित्त वर्ष के लिए जारी हो जाता है।
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