ऐसा कफ सिरप,एक बार पीयो तो दोबारा तकलीफ होगी नहीं

लोग कहते हैं कि पहले का जमाना बहुत अच्छा हुआ करता था। सारी चीजें शुद्ध और स्वास्थय के लिए अच्छी रहा करती थीं। लेकिन उसी जमाने में एक ऐसी दवा भी थी जो क्लोरोफॉर्म और मॉर्फीन से बनाई जाती थी।

आप पढ़कर ही अंदाजा लगा सकते हैं कि कैसी बेवकूफी भरी और खतरनाक बात की जा रही है।
बात जब स्वास्थय की आती है तो हर कोई अच्छी चीजें ही इस्तेमाल करना चाहता है। बीमार होना किसे पसंद होगा। और अगर बीमार हो भी गए तो बड़ी जल्दी होती है हमें ठीक होने की। हम ये भी नहीं देखते कि ठीक होने के लिए जो हम ले रहे हैं कहीं वही हमें और बीमार न कर दे।

ऐसी ही एक दवा जो कहने को तो दवा थी लेकिन अगर ध्यान से न ली गई तो बीमार होने के लिए आपको दूसरा मौका ही नहीं मिलता।
‘वन नाइट कफ सिरप’ एक ऐसी खांसी की दवा जिसके इनग्रीडिएंट्स ऐसे थे जो किसी को ठीक करते हों तो बड़ी बात है। इस कफ सिरप को एकोहल, मरीजुआना, क्लोरोफॉर्म और मॉर्फीन से बनाया जाता था।

ये एक अमेरिकी दवा थी जिसे 1888 में बाल्टीमोर में बनाया जाता था। कफ सिरप पर इंग्रीडिएंट्स के नीचे लिखा रहता था, ‘स्किलफुली कंबाइंड विध अ नंबर ऑफ अदर इंग्रीडिएंट्स।’

इसके हिसाब से तो सिरप में कोको की पत्तियां और नाइट्रेट होने चाहिए थे।
वो इसे वन नाइट कफ सिरप शायद इसलिए बुलाते होंगे क्योंकि जो भी इसे पीता होगा उसको दोबारा बीमार होने के लिए कभी होश ही नहीं आता होगा।

चौकिए नहीं! इसके इंग्रीडिएंट्स ही ऐसे हैं जो लोगो के लिए इतने नुकसान दायक हैं कि अगर बताई गई मात्रा से 1 बूंद भी ज्यादा हो जाए तो आपको हमेशा के लिए सुला सकती है।

इस तरह की सिरप को कोई दवा कैसे बुला सकता है? या तो उन लोगो का शरीर जरूरत से ज्यादा ताकतवर होगा जिससे वो लोग इस सिरप को पीकर ठीक हो जाते होंगे।

सवाल ये उठता है कि इसके हार्मफुल साइड इफेक्स के बावजूद क्या ये सच में लोगों को ठीक कर पाता था? या फिर इसका मान ही सबकुछ ब्यां कर देता है। ‘वन नाइट कफ सिरप’ रात को पियो और फिर कभी सुबह होने की उम्मीद न करो।

खेर देर से ही सही लेकिन लोगों को अकल आई और 1934 में इसको बैन कर दिया गया जब एक कंज्यूमर प्रोटेक्शन एजेंसी ने इस मामले की जांच की और पाया कि इस दवा का लोगों को ठीक करने का दावा बिलकुल गलत है और स्वास्थय के लिए बिल्कुल भी सेफ नहीं है।

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