ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से 50,000 करोड़ का नुकसान

देश भर में पिछले आठ दिन से जारी ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से अर्थव्यवस्था को अब तक 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। उद्योग संगठन एसोचैम ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से पहले ही कई जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं।
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हड़ताल से ऑटोमोबाइल सेक्टर बुरी तरह प्रभावित
हड़ताल से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और अब तक लगभग 50,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। उसने ट्रांसपोर्टरों और सरकार दोनों से इस मसले पर विचार-विमर्श शुरू करने और हड़ताल समाप्त करने के उपाय ढूंढऩे की अपील की है। वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम ने भी बयान जारी कर कहा कि हड़ताल से ऑटोमोबाइल सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कंपनियां अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही हैं क्योंकि तैयार वाहनों का आवागमन तथा कलपुर्जों की आवाजाही रुक गई है। निर्यात के लिए जाने वाहन भी रास्तों में रुके पड़े हैं।
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आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से कंपनियों में असेंबली लाइने रुकी
आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण कंपनियों में असेम्बली लाइनें रुकी पड़ी हैं। उसने भी सभी हितधारकों से जल्द से जल्द समाधान ढूंढऩे की मांग की है। एसोचैम ने कहा कि एक तरफ कंपनियों को कच्चे माल की आपूर्ति रुक गई है और दूसरी ओर तैयार माल को बाजार में भेजने में दिक्कत आ रही है। सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को ट्रांसपोर्टरों की उचित मांगें मान लेनी चाहिए क्योंकि उनकी परिचालन लागत काफी बढ़ गई है। साथ ही हम ट्रांसपोर्टर संगठनों से भी अपील करते हैं कि वे हड़ताल समाप्त कर स्वीकार्य समाधान खोजने का प्रयास करें।

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