गजब ! उर्दू में लिखी रामायण 100 साल बाद कबाड़ में मिली

वाराणसी के हनुमान मंदिर से 18वीं शताब्दी में हस्तलिखित पांडुलिपी 2011 में चोरी हो गई थी। तब महंत परिवार के लोग पांडुलिपियों का पता लगाने देश के कोने-कोने तक गए थे।

हिन्दुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ी रामायण की 105 साल पुरानी कृति मिली है। दिलचस्प है कि ये रामायण उर्दू में लिखी है। वाराणसी के संकट मोचन मंदिर के महंत परिवार को ये रामायण दिल्ली में कबाड़ की दुकान से मिली। उन्होंने इसे कबाड़ी से 600 रुपए में खरीदा। संकट मोचन मंदिर और अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के प्रमुख महंत और बीएचयू के प्रो. विशंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि उर्दू में लिखी इस रामायण 650 पृष्ठ हैं। 1910 में इसका प्रकाशन लाहौर (अब पाकिस्तान में) में हुआ। 2013 में वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी इसे दिखा चुके हैं। उस वक्त वो पीएम नहीं थे। उर्दू में लिखी रामायण देखकर मोदी काफी खुश और प्रभावित हुए थे।

600 रुपए में मिली थी रामायण 

वाराणसी के हनुमान मंदिर से 18वीं शताब्दी में हस्तलिखित पांडुलिपी 2011 में चोरी हो गई थी। तब महंत परिवार के लोग पांडुलिपियों का पता लगाने देश के कोने-कोने तक गए थे। इस दौरान वो दिल्ली के गुदड़ी बाजार में एक कबाड़ की दुकान में पांडुलिपी का पता लगाने पहुंचे। यहां उन्हें लाहौर से प्रकाशित 1910 की दुर्लभ रामचरितमानस मिली। उन्होंने इसे 600 रुपए में खरीदा था।

नायाब पांडुलिपी संग्रहालय 

1910 में लाहौर से प्रकाशित उर्दू रामायण की ओरिजनल प्रति सहित 1704 में लिखी गई रामचरितमानस की पांडुलिपि आज भी संकट मोचन मंदिर में सुरक्षित है। इन्हें वाकायदा बुलेट और वॉटर प्रूफ अलमारी में सहेजा गया है। लगभग 400 साल पुराना दुर्लभ चित्रों का संग्रह भी यहां धरोहर के रूप में मौजूद है।

भदोही शिवव्रत लाल ने लिखी उर्दू रामायण

लाहौर में प्रकाशित रामायण की पांडुलिपि को भदोही में कानूनगोपुर के शिवव्रत लाल ने लिखा था। बाद में वो राधा स्वामी संप्रदाय के संत हो गए। पहली बार उन्होंने बाल्मीकि रामायण का उर्दू में अनुवाद 650 पन्नों में किया। उनकी लिखी दस पन्नों की प्रस्तावना अत्यंत खूबसूरत है। रामकथा के जो चार चित्र अंदर बनाए गए वे भी बेजोड़ हैं।

ऑनलाइन होंगी सारी पांडुलिपियां

सारी पांडुलिपियों को डिजिटल फॉर्मेट में ऑनलाइन लाइब्रेरी की तरह बनाया जा रहा है। सारी पांडुलिपियों को इटैलियन विधि से संजोया गया है ताकि लम्बे समय तक वो खराब न हों। यहां संपूर्ण रामायण से जुड़े एल्बम को भी डिजिटल किया जा रहा है।

 

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