ऐसे तैयार होते हैं देश के सबसे खूंखार कमांडो

किसी भी देश को ताकतवर बनाने के पीछे उसकी स्पेशल फोर्सेस का हाथ होता है जिसके दम पर हर देश दुनिया के सामने एक नई शक्ति के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। विशेष सैन्य और रक्षा बल ही अपने देश का सम्मान बनाने और विश्व में एक अलग पहचान बनाते हैं।
आतंकवादियों पर बस इनकी नजर पड़ी और वो जमीन पर मरे हुए आते हैं नजर। इन भारत माता के सपूतो पर होता है दुश्मन को मार गिराने का खून सवार। आंधी से तेज है इनकी रफ्तार… आग, पानी और आसमान हर जगह से अपने दुश्मन को मारने के लिए तैयार रहते हैं भारत के सबसे खूंखार मार्कोस (मरीन) कमांडो।

मार्कोस दुनिया के सबसे बेहतरीन कमांडोज में से एक हैं। मार्कोस कमांडोज की ट्रेनिंग दुनिया में सबसे कठिन ट्रेनिंग मानी जाती है। कमांडोज की ये ट्रेनिंग Army Paratroopers और पश्चिमी देशों के सैनिकों से कहीं कठिन होती है। भारतीय मार्कोस कमांडोज की ट्रेनिंग यूएस नेवी सील के समान ही होती है। आइए एक नजर डालते हैं मार्कोज कमांडोस की ट्रेनिंग के चरणों पर।

1. HALO और HAHO Jump – एक मार्कोस कमांडो बनने की पहली शर्त HALO और HAHO Jump है। आइए आपको बताते हैं क्या होती है HALO और HAHO Jump।

HALO Jump – धरती से 11 किलोमीटर की ऊंचाई से कूदना होता है. इसमें कमांडो को अपना पैराशूट धरती के नज़दीक पहुंचने पर ही खोलना होता है।
HAHO Jump – धरती से 8 किलोमीटर की ऊंचीई से कूदना होता है। इसमें कमांडो को अपना पैराशूट कूदने के बाद 10-15 सेकेंड बाद खोलना होता है। 8 किलोमीटर की ऊंचाई से ये कूद -40 डिग्री सेल्सियस तापमान में होती है।

2. मार्कोस कमांडोज के सुबह की शुरुआत रोजाना 20 किलोमीटर की दौड़ से होती है।

3. सुबह की दौड़ के बाद दिन में 60 किलो वजन के साथ 20 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होती है।

4. मार्कोस कमांडोज की सारी ट्रेनिंग एक्टिव हथियारों के साथ होती है, जिनमें गोला-बारूद होता है।

5. हफ्ते में एक दिन मार्कोस कमांडोज को 60 किलो वजन के साथ 120 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होती है। इस ट्रैकिंग को एक समय के अंदर पूरा करना होता है। नहीं कर पाने पर आप बाहर हो जाते हैं।

6. हफ्ते में एक दिन 20 घंटे लगातार ट्रेनिंग होती है। ये पूरे 20 घंटे जिम करने जैसा होता है।

7. ट्रेनिंग के दौरान मार्कोस कमांडोज को रोज के शारीरिक श्रम करने के बाद भी हफ्ते में केवल 4 घंटे सोने को मिलते हैं।

8. साथ ही मार्कोस कमांडोज को रोज शाम को 25 किलो वजन के साथ कीचड़ में दौड़ना होता है।

9. इसके बाद पार करनी होती 2.5 किलोमीटर की बाधा दौड़।

10. इन सब के बाद 25 मीटर दूर खड़े साथी के बगल में स्थित टारगेट में लगाना होता है निशाना। कमांडोज को निशाना चूकने और गोली न चलाने दोनों स्थिति में फेल कर दिया जाता है।

11. मार्कोस कमांडोज के लिए आने वाले 90 प्रतिशत जवान कठिन ट्रेनिंग के कारण इस ट्रेनिंग को पूरा नहीं कर पाते हैं।

12. मार्कोस कमांडोज की ट्रेनिंग दो साल या उससे ज्यादा हो सकती है।

13. मरीन कमांडोज कहीं भी लड़ सकें इसके लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार किया जाता है। ऊंचे क्षेत्रों में इनकी ट्रेनिंग होती है ताकि ये ठंडे क्षेत्रों में लड़ पाएं। इसके साथ ही जंगल और पहाड़ों में भी इनकी विशेष ट्रेनिंग होती है।

14. मार्कोज कमांडोज जमीन पर लेट कर, सामने या पीछे दौड़ते हुए सटीक फायरिंग कर सकते हैं। इसके साथ ही ये कमांडो आईने में देखते हुए गोली चला सकते हैं।

15. मार्कोज कमांडोज का रिएक्शन टाइम 0.27 सेकेंड होता है।

16. मार्कोज कमांडोज विदेशी भाषाओं जैसे अरबी या दूसरी भाषा में भी दक्ष होते हैं।

मार्कोस कमांडोज देश के सबसे दक्ष सैनिक होते हैं। जो हर विपरीत स्थिति से निपटने को हमेशा तैयार रहते हैं। मार्कोस कमांडोज की पहचान गुप्त रखी जाती है। इनके लिए यूनिफॉर्म पहनना कम्पलसरी नहीं होता है। मुंबई हमले के समय इन्हीं कमांडोज ने आतंकियों का खात्मा किया था। अपनी पहचान गुप्त कर देश की रक्षा करने वाले ये सैनिक देश के पहरेदार हैं।

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