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4 घंटे में 8 किमी पैदल चलकर पहुंचा अस्पताल, मरीज को बचाने के लिए पुणे के डॉक्टर ने तय किया मीलों का सफर

कोई भी व्यक्ति जब डॉक्टर बनता है तो अपने पद की जिम्मेदारियों की शपथ लेता है। वो उस पद के अनुकूल अपनी जिम्मेदारी, काम के प्रति निष्ठा और लोगों की जिंदगी बचाने की कसमें खाता है। इस शपथ का सटीक उदाहरण बने हैं महाराष्ट्र के डॉ सुशील जे देशमुख। जिन्होंने आठ पैदल किलोमीटर चलकर गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज की जान बचाई है।

दरअसल 9 जुलाई को, पुणे ने पारंपरिक संत तुकाराम महाराज पालखी जुलूस निकला था जिसकी वजह से शहर के ज्यादातर रास्ते बंद कर दिये गये थे। लोहेगांव का रहने वाला नितिन नाथजी रेबहान जुलूस को देखना चाहता था। क्योंकि बचपन से उनसे इस परंपरा के बारें में अपने दोस्तों और परिवार वालों से सुना है। लेकिन नितिन को क्या पता था कि आज का दिन उसकी जान पर बन आएगा।

जब नितिन जुलूस देखना गया तो अचानक ही  उसके पेट में दर्द होने लगा। उसने पहले इसे अनदेखा करने का फैसला किया। दर्द बढ़ जाने की वजह से तकरीबन 2 बजे नितिन को पास  के विश्वराज अस्पताल ले जाने का फैसला किया। लेकिन जुलूस की वजह से रास्ते बद थे। परिवार पैदल ही नितिन को अस्पताल ले गया। नितिन की हालत औऱ खराब हो गई थी। जांच के बाद पता चला कि नितिन के लीवर में फोड़ा था जोकि फट गया था। 6 बजे तक नितिन को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। जहां उसकी आपातकालीन सर्जरी करने के लिए कहा गया। सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि उस समय अस्पताल में कोई बड़ा डॉक्टर मौजूद नहीं था।

डॉक्टरों की टीम ने डॉ देशमुख को केस के बारें में बताया। और अस्पताल आने के लिए कहा। वही जुलूस की वजह से डॉक्टर अपने घर में ही फंस कर रह गये थे। डॉ देशमुख ने हडपसर में अपनी कार पार्क की और लोनी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलकर 4 घंटे में अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने 10:00 बजे चलना शुरू किया था जो विश्वराज अस्पताल 3:00 बजे पहुंचे। हालांकि इस समय वो अपने कर्मचारियों के संपर्क में थे और यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया कि नितिन स्थिर था और सर्जरी के लिए तैयार हो गया था।

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