लाखों की ली जान..किया करोड़ों का नुकसान, 64 सालों में बाढ़ ने ऐसे मचाई है तबाही

epa06094078 Cars are submerged in a flooded street after torrential rain in Istanbul, Turkey, 18 July 2017. Heavy rain caused extensive flooding of roads and stations in Istanbul. EPA/STRINGER

देश में पिछले 64 वर्षों में बाढ़ के कारण 1.07 लाख लोगों की मौत हुई और 8 करोड़ से अधिक मकानों को नुकसान हुआ। 25.6 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में 109202 करोड़ रुपये मूल्य की फसलों को नुकसान पहुंचा है।

इस अवधि में बाढ़ के कारण देश में 202474 करोड़ रुपये मूल्य की जनसुविधाओं की हानि हुई है। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी प्राप्त हुई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पिछले 64 वर्षों के दौरान बाढ़ से प्रति वर्ष औसतन 1654 लोग मारे गए, 92763 पशुओं का नुकसान हुआ, औसतन 71.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, 1680 करोड़ रुपये मूल्य की फसलें बर्बाद हुईं और 12.40 लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।

1953 से 2017 के दौरान देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बाढ़ के कारण 46.60 करोड़ हेक्टेयर इलाके में 205.8 करोड़ जनसंख्या प्रभावित हुई, 8.06 करोड़ घरों को नुकसान पहुंचा, 53576 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को नुकसान हुआ और 60.29 लाख पशुओं की हानि हुई।

मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह के अनुसार, बाढ़ और सूखा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं इसलिए इन दोनों का समाधान सामुदायिक जल प्रबंधन से ही संभव है।

जल के अविरल प्रवाह को बनाए रखना होगा और इस काम से ही जल के सभी भंडारों को भरा रखने के साथ बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सकता है। उनका मानना है कि सरकार को चाहिए कि अंधाधुंध बांध बनाने की वर्तमान नीति पर पुनर्विचार करे। नदियों के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाये रखने पर भी जोर देना चाहिए।

देश में समन्वित बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया। नदियों के किनारे स्थित गांव में बाढ़ से बचाव के उपाए नहीं किए गए। आज भी गांव में बाढ़ से बचाव के लिए कोई व्यवस्थित तंत्र नहीं है।  नूर मोहम्मद,  पूर्व सचिव राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार (एनडीएमए)  

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