इस शख्स ने कई झील,तालाब को दिया हैं नया जीवन, अब कर रहा कई गांव की सहायता

पानी की समस्या से हमारा देश आज से नहीं बल्कि कई सालों पहले जूझ रहा है। पानी के घटते श्रोत को लेकर कई तरह के अभियान भी चलाए गए। हालांकि पानी की समस्या केवल हमारी देशे की नहीं है बल्कि पूरी दुनिया की है। सभी के लिए पानी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने इतिहास में अब तक के सबसे बड़े जल संकट से जूझ रहा है।

 

वहीं, इन सभी रिपोर्टों और आंकड़ों के मुताबिक इसके लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार या किसी निजी संगठन ने जल स्त्रोतों को बचाने का कोई बड़ा कदम अभी तक नहीं उठाया। लेकिन उत्तर प्रदेश के 25 साल के एक युवक ने खुद इसकी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने इस समस्या से खुद निपटने के बारे में सोचा है।

25 साल के रामवीर तनवार यूपी के ग्रेटर नोएडा के दाधा गांव में रहते है। उन्होंने अपनी लगन और काम से करबी दर्जन भर झीलों और तालाबों को एक नया जीवनदान दिया है। रामवीर कहते हैं, वो इन झीलों की दुर्दशा देखकर काफी परेशान रहते थे, जिसके बाद उन्होंने इनकी सफाई करने का फैसला किया। तनवार पेशे से एमएनसी में बतौर इंजीनियर काम करते है। उन्होंने साल 2014 से झीलों और तालाबों को साफ करने की योजना पर काम करना शुरू किया।

 

रामवीर कहते हैं कि, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में दो शहर हैं- एक नोएडा और दूसरा ग्रेटर नोएडा। नोएडा में 200 से अधिक झीलें थीं लेकिन अब शहर में आधिकारिक तौर पर एक भी झील नहीं है। वहीं, ग्रेटर नोएडा की स्थिति भी इसी से काफी मिलती है। यहां पर झीलें तो है लेकिन वो भी मरने की दशा में है।

 

रामवीर ने बताया कि, पिछले साल दाबर गांव में वो अपनी टीम के साथ वहां के झीलों को देखने के लिए गए। जहां पर उन्होंने झीलों के अंदर पड़े कचरे को साफ करने की कोशिश की। उनके इस काम में उन्हें वहां के स्थानीय लोगों की भी पूरी मदद मिली। कुछ स्थानीय लोग उनके साथ मिलकर झील का कचरा साफ करने लगे तो कुछ उन्हें कई तरह के उपकरण देनें लगे जिससे वो झील का कचरा साफ कर सकें। जिसके बाद उन्होंने वन विभाग से भी संपर्क किया। जिससे उन्होंने उस झील के चारों ओर पौधें लगाने की मदद मांगी। इस काम में भी उन्हें विभाग की पूरी मदद मिली। अब उस झील के किनारे लगाए गए पौधे काफी बड़े भी हो गए है।
रामवीर का कहना है कि, उन्होंने देखा कि, बहुत सारे प्लास्टिक सीधे तौर पर इन झीलों में फेंके जाते है, जिससे अंडरग्राउंड वाटर की रिचार्जिंग प्रक्रिया में बाधा आती है। जिसे दूर करने के लिए उन्होंने double filtration system तैयार किया। जिसके बाद अब झील में जाने वाले किसी भी पानी को पहले एक लकड़ी की जाली फिर एक घास की जाली से होकर गुजरना होता है।
लकड़ी का बनाया जाल प्लास्टिक की बोतलों जैसी बड़ी वस्तुओं को झील में जाने से रोकता है, इससे उस जाल से सिर्फ पानी ही झील तक जाता है। सारा कचरा जाल के दूसरी तरफ ही जमा हो जाता है।

 

रामवीर कहते हैं कि, इस साल अभी तक उन्होंने 3 से 4 झीलों को साफ कर उन्हें एक नया जीवनदान दिया है। उनका कहना है कि, वो ये समझते हैं कि, ये सिर्फ एक बार काम नहीं होता, इसीलिए झील को जिंदा रखने के लिए उन्होंने वहां के मछुआरों को बताया कि, वो सिर्फ उनकी झीलों को साफ कर सकते हैं, लेकिन उसे हमेशा साफ बनाए रखना उन्ही के कंधों पर है।

रामवीर पर्यावरणविद विक्रांत टोंगाड को अपनी प्रेरणा मानते हैं, और वे पर्यावरण को लेकर काफी भावुक भी रहते हैं। रामवीर ने बताया कि, जब वो बी.टेक की पढ़ाई कर रहे थे तो अपने दोस्तों के साथ वो इन तालाबों और झीलों में चारों ओर खेलते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, ये झीलें भी खत्म होती गई। जो 2-4 बची भी थी उनकी भी हालात काफी खराब थी।

 

रामवीर ने अपने कॉलेज के दिनों में ही जल चौपाल शुरू की। जहां पर ग्रामीणों को इकट्ठा कर उन्हें जल संरक्षण की जरूरी बातें बताया करते थे। उनका कहना है कि, गांव के लोग जागरूकता की कमी के कारण पानी बर्बाद करते है। क्योंकि, उन्हें नहीं पता कि, वे इसे कैसे बचाएं।

उन्हेंनें अपना काम सिर्फ एक गांव से शुरू किया था लेकिन अब वो 50 गावों को भी जोड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि, यूपी सरकार ने भूजल सेना नाम से हर एक जिले में एक समूह बनाया। और उन्हें उनके जिले का कॉर्डिनेटर बनाया गया है। ताकि वो इस समूह को बेहतर तरीके से चला सकें।

Facebook Comments