इस किन्नर का बधाई गाने का काम छूट तो ट्रेन में भीख माँगा,आज मिसाल कायम की…

गुड़िया के पैदा होने पर परिवार वालों पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा, क्योंकि वो एक किन्नर थी। भारी मन से परिवार वालों ने उसे पाला, लेकिन जब वह 16 की हुई तो समाज के तानों ने उसका जीना मुश्किल कर दिया। जिसके बाद उसने घर छोड़ दिया। ढाई साल बाद घर लौटी और बड़े भाई की इजाजत से अपनी गुरु रोशनी के साथ मंडली में बधाई गाने के लिए जाने लगी। इसके बाद उसकी जिंदगी की मुश्किलें कम नहीं हुई। खाना बनाते समय सिलेंडर फटने से उसके शरीर का काफी हिस्सा झुलस गया। इस घटना के बाद बधाई गाने का काम भी छूट गया। इसके बाद उसने ट्रेनों में भीख मांगना शुरू कर दिया।

गुड़िया भारी मन से बताती है कि  “जब हम बधाई के काम में जाते रहे तो लोग कहते थे ये जली है। लोग शमशान से पहले जल जाता है। तुम शमशान से उठकर आई। मेरे गुरु की दाल-रोटी झिनने लगी तो हमने गुरु का साथ छोड़ दिया और ट्रेन में भीख मांगने लगे।” गुड़िया के पैर भीख मांगने के लिए  बढ़े तो जरूर थे लेकिन इस बार ज़िंदगी की हर मुश्किल को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए। उसने ट्रेन में मांगे गए पैसों से दो पॉवरलूम लगाए और उससे गुजर-बसर का इंतज़ाम किया।

गुड़िया ने जिंदगी की इतनी मुश्किलों को झेलने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद गुड़िया ने नेक काम की तरफ कदम बढ़ाया। यह कदम था ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का। उसने दो बेटियों को गोद लिया और उनकी तामील में खुद को झोंक दिया। अब वह ट्रेन में भीख नहीं मांगती बल्कि मुल्क में बेटियों को पढ़ाने और बचाने के लिए बड़ी मिसाल पेश कर रही है। गुड़िया, बेटियों को लेकर कहती है कि “आज अगर बेटी को पढ़ाएंगे लिखाएंगे, अच्छा भविष्य देंगे तो मेरी बेटी बेटा से कम नहीं होगी। मेरी बड़ी बेटी विकलांग है, वह उतना पढ़ नहीं पाती और छोटी लड़की के बारे में तो हमारी दिल में तमन्ना है कि उसको डॉक्टर बनाएंगे।”

गुड़िया ने जन्म के बाद जिंदगी के कई तरह के मुश्किलों का सामना किया है। समाज और परिवार से उपेक्षित गुड़िया को सिर्फ भाई और भाभी ने जिंदगी जीने का हौसला दिया। लिहाजा भाई के उस क़र्ज़ को वह उसकी दिव्यांग बेटी को गोद लेकर उतार रही है। भाई की उस बच्ची को गुड़िया न सिर्फ दीनी तालीम दे रही है बल्कि उसे पॉवरलूम की बारीकियां भी सिखाकर अपने पैरों पर खड़े होने की हिम्मत दे रही है।

जिस समाज ने किन्नर होने का पाप झेला,समाज के ताने सुने। लेकिन गुड़िया ने हौसला ना हारते हुए बड़े हौसले से करघे के जरिए न सिर्फ ज़िंदगी की खुशनुमा चादर बना रही है बल्कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का बड़ा संदेश भी समाज को दे रही है।

 

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