इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों का औसत पूरी दुनिया से 7 गुना अधिक….

कोच्चि से 150 किलोमीटर दूर स्थित कोडिन्ही गांव का हाल देखकर पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सकते में हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों का औसत पूरी दुनिया से 7 गुना अधिक है।

मल्लापुरम जिले में तिरुरंगाड़ी कस्बे से सटे इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों की तादाद का अंदाजा इससे लगता है कि तकरीबन दो हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के हर घर में जुड़वां बच्चे हैं। यहां नवजात जुड़वां बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक जुड़वां हैं।

आम तौर पर दुनियाभर में 1,000 में मात्र 6 ही जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं, जबकि यहां हर 1,000 बच्चों में 42 जुड़वां पैदा होते हैं। गांव में एंट्री करते ही नीले रंग के एक साइनबोर्ड पर लिखा है-‘भगवान के अपने जुड़वां गांव, कोडिन्ही में आपका स्वागत है.’ दुनियाभर में इस शहर को जुड़वां गांव के नाम से जाना जाता है। जानकारी के मुताबिक जुड़वां बच्चों का सिलसिला यहां करीब 70 साल पहले शुरू हुआ। यहां 70 बरस की जुड़वां बहनें हैं, जिन्हें यहां का सबसे बड़ी उम्र का जुड़वां कहा जा सकता है। किसी दूसरे गांव की लड़की यहां ब्याह कर आती है तो उनके भी जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। गांव में जुड़वां की गुत्थी को समझने के लिए कुछ समय पहले भारत, जर्मनी और ब्रिटेन का एक संयुक्त अध्ययन दल यहां आया था और उन्होंने यहां के लोगों के डीएनए का अध्ययन करने के लिए कुछ नमूने इकट्ठे किए। लेकिन जुड़वां बच्चे पैदा होने की कोई ठोस वजह आज तक मालूम नहीं हो पाई।

गांव में जुड़वां का हाल यह है कि स्कूल में हर कक्षा में जुड़वां लड़के-लड़कियों के जोड़े दिखाई पड़ते हैं। एक पानी पीने जाता है तो शिक्षक दूसरे को जाने से रोक देता है कि अभी तो पीकर आए हो. घर में भी एक ने खाना खाया और दूसरे ने नहीं खाया तो पता चला मां उसी को दोबारा खिलाने लगी, जो अभी खाकर गया है। एक शरारत करे और चपत दूसरे को पड़े यह तो अकसर होता है।

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