स्वामी विवेकानंद ने मुंहतोड़ जवाब दिया था जब उनसे एक मुस्लिम ने मूर्ति पूजा पर सवाल उठाया

स्वामी विवेकानंद जो हिंदू प्रतिनिधि के रूप में उभरे थे। इस बात को लेकर मुस्लिम नवाब और स्वामी विवेकानंद जी से काफी देर बातचीत करते रहे। और जब स्वामी विवेकानंद का जाने का समय हो गया। तो जाते-जाते मुस्लिम नवाब ने स्वामी विवेकानंद जी से एक सवाल पूछा।

मुस्लिम नवाब ने स्वामी विवेकानंद जी से कहा कि क्या मैं आपसे एक सवाल कर सकता हूं। स्वामी विवेकानंद जी ने बड़ी ही प्रसन्नता से कहा हां जरूर। मैं आपके सवाल का जवाब जरूर दूंगा। तभी मुस्लिम नवाब ने स्वामी विवेकानंद से कहा कि ईश्वर और अल्लाह एक ही है। हिंदू और मुस्लिम सब आपस में भाई हैं। तो फिर हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा क्यों करते हैं। इतना कहते ही स्वामी विवेकानंद जी को मुस्लिम नवाब के पीछे लगी एक तस्वीर दिखाई दी । जो उनके पिता की थी।

स्वामी विवेकानंद जी ने मुस्लिम नवाब को वह तस्वीर लाने को कहा। और बोले कि आप इस आप तस्वीर को फेंक दें। मुस्लिम नवाब ने कहा कि स्वामी जी ये आप यह क्या कह रहे हैं। ये मेरे पिता की तस्वीर है। इसमें में अपने पिता को देख सकता हूं। तभी स्वामी विवेकानंद जी ने कहा कि जिस तरह आप इस तस्वीर में अपने पिता को देख सकते हैं। ठीक उसी तरह हम भी मूर्ति के अंदर भगवान को देख सकते हैं। इतना कहते ही मुस्लिम नवाब को अपनी गलती का एहसास हो गया और बोले कि आप सही कह रहे हैं।

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