यूपी में जंगलराज: CM हेल्पलाइन में महिलाओं के साथ बदसलूकी, कई लड़कियां बेहोश

योगी सरकार के महिला सुरक्षा के तमाम दावों की पोल तब खुल गई जब प्रदेश में शुक्रवार को सीएम हेल्पलाइन के कॉल सेंटर में महिलाओं को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। इस दौरान टॉर्चर के कारण लड़कियां बेहोश हो गईं। इसके बाद उन्हें लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने भी महिलाओं को जेल में डालने की धमकी दी।

मामला लखनऊ के गोमती नगर के विभूतिखंड स्थित साईबर हाईट का है। इस सेंटर में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में काम करने वाली महिला टेलीकालरों को पिछले चार महीने से वेतन नहीं मिला है।शुक्रवार को इन युवतियों ने वेतन की मांग की, तो इस सेंटर के संचालकों ने सभी युवतियों को एक कमरे में बंद कर दिया। आरोप है कि इस दौरान उनसे जोर-जबरदस्ती की गई और सादे कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। इतना ही नहीं मना करने पर कुछ युवतियों के कपड़े खींचे गए। इसी रस्साकशी में कुछ लड़कियां बेहोश भी हो गईं।

इस मामले में विभूतिखंड थाना प्रभारी सत्येंद्र कुमार राय का कहना है कि कर्मचारियों को तीन महीने की ट्रेनिंग का और एक महीने काम करने का वेतन नहीं मिला है। मामले की पड़ताल कर उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

युवतियों का आरोप है कि इंकार करने पर उनका दुपट्टा खींच कर बदतमीजी की गई। इस बीच मोहनलालगंज की शालू यादव, बिहार की शिवानी, मडियांव की सीमा, जौनपुर निवासी मंजू यादव और मडियांव की निवासी शमा नाज परवीन समेत कुछ लड़कियां बेहोश हो गईं जिसके बाद सकते में आए दोनों ट्रेनर भाग निकले। साथी कर्मचारी उन्हें लोहिया अस्पताल में लेकर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस टीम से भी सबकी भिड़ंत हुई। टेलीकॉलरों ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले विभूतिखंड इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार राय से मामले की शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस ने उन लोगों को ही जेल बन्द करने की धमकी दी थी।

इस मामले में बीपीओ के प्रोजेक्ट हेड ध्रुव मिश्रा ने कहा कि कंपनी में कई शरारती तत्व हैं जो लोगों को भड़का रहे हैं। हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे माहौल खराब कर रहे हैं। लड़कियों के उत्पीड़न के मामले में उनका कहना है कि आरोप गलत है लेकिन इस शिकायत की जांच कराएंगे। हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, उनके जरिए जांच की जाएगी।

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