यह हैं वे 5 महापुरुष जिन्हें मिला था अमरता का वरदान, आज भी हैं जीवित

विभीषण

दोस्तों विभीषण के बारे में तो शायद आप सभी जानते ही होंगे। विभीषण रावण का भाई था। रामायण के अंदर यह बताया गया है, कि रावण के भाई विभीषण ने श्रीराम का साथ दिया था और श्री राम ने विभीषण को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था।

राजा बलि

दोस्तों राजा बलि की कहानियां तो आप सभी ने सुनी होंगी और किताबों में खूब बड़ा होगा। राजा बलि एक महान दानी हुआ करते थे। बताया जाता है, कि उन्होंने विष्णु के वामन अवतार को अपना सर्वस्व दान कर दिया था। जिसके बाद भगवान विष्णु राजा बलि से प्रसन्न होकर उन्हें अमृतत्व का वरदान दिया था और राजा बलि को पाताल का राजा भी बनाया था।

हनुमान

हनुमान जी की अगर हम बात करें, तो उन्हें भी अमृतत्व का वरदान प्राप्त हुआ था। इन सब की मौजूदगी रामायण और महाभारत दोनों में पाई गई है। सीता माता ने अशोक वाटिका के नीचे हनुमान जी को यह वरदान दिया था, कि वे अजर अमर रहेंगे।

ऋषि मार्कंडेय

ऋषि मार्कंडेय कि अगर हम बात करें, तो ये भगवान शिव के परम भक्त माने जाते है। ऋषि मार्कंडेय ने कठोर तपस्या के द्वारा महामृत्युंजय मंत्र को सिद्ध कर मृत्यु पर विजय प्राप्त कर ली और वे सदा के लिए चिरंजीवी हो गए।

अश्वधामा

महाभारत में यह बताया जाता है, कि अश्वधामा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र है। अश्वधामा को भगवान श्री कृष्ण के द्वारा श्राप दिया गया था, कि अश्वधामा अनंत काल तक इस धरती पर भटकते रहेंगे और इसके शरीर में इस प्रकार के रोग होंगे, जो कभी भी सही नहीं होंगे। भगवान श्री कृष्ण ने यह श्राप अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में ब्रह्मास्त्र चलाने के कारण अश्वधामा को यह श्राप दिया गया था।

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