विजय माल्या पर भारत के करीब 13 बैंकों का कुल 9000 करोड़ रुपया बकाया….

बता दें कि 2004 में माल्या ने ये तलवार लगभग 4 करोड़ रुपये में खरीदी थी। इसके साथ ही उन्होंने न्यूयॉर्क में महात्मा गांधी के स्मृति चिह्नों की विवादास्पद नीलामी में भी लगभग 11 करोड़ रुपये की बोली लगाकर बाजी मारी थी। और मामले को लेकर माल्या के परिवारवालों का कहना है कि तलवार खरीदना उनके लिए सबसे बुरा था, क्योंकि उसके बाद से ही विजय माल्या लगातार कर्ज में डूबते चले गए।

बता दें कि विजय माल्या पर भारत के करीब 13 बैंकों का कुल 9000 करोड़ रुपया बकाया है। इसी मामले में मंगलवार को लंदन की कोर्ट में सुनवाई भी हुई, जहां 13 भारतीय बैंकों की तरफ से याचिका दायर की गई है। भारतीय बैंक लंदन कोर्ट को ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि माल्या की वैश्विक संपत्ति पर फ्रीज ऑर्डर को छुट नहीं दी जानी चाहिए। वकील ने तलवार को एक उदाहरण बताते हुए कहा कि माल्या कैसे अपनी परिसंपत्तियों को ही गायब कर दे रहा है।

इसके अलावा बेंगलुरु में माल्या के एक करीबी का भी कहना है कि एक बार माल्या ने उन्हें भी एक म्यूजियम देने का ऑफर दिया था, जो कि उसने लंदन की नीलामी में खरीदा था। हालांकि बाद में माल्या ने उसका किया ये उन्हें भी नहीं पता। इसके अलावा टीपू सुल्तान की तलवार को लेकर मामला बढ़ता जा रहा है क्योंकि टीपू की पीढ़ी के 7वें वशंज साहेबजादा मंसूर अली का कहना है कि उन्होंने तलवार के लिए कई बार माल्या से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें टीपू की तलवार के बारे में कुछ नहीं पता चल सका।

मंसूर अली का कहना है कि वे इन ऐतिहासिक चीजों के लिए कोर्ट में जाएंगे और माल्या पर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। बता दें कि माल्या ने 2004 में निजी नीलामी में तलवार को 1.5 करोड़ रुपये में खरीदा था और इसे 2004 के विधानसभा चुनावों में जब वह जनता पार्टी के अध्यक्ष बने थे, तब उसे फेंक दिया गया था। माल्या ने चुनाव में सभी सीटें गंवा दीं थीं।

माल्या के वकील का कहना है कि भारतीय मीडिया उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रही हैं और माल्या को भारत में बदनाम किया जा रहा है। उनके वकील ने कहा कि माल्या ने अपने एफिडेविट में खुद को बिजनेसमैन लिखा है। जबकि भारतीय बैंकों की तरफ से पेश वकील का कहना है कि माल्या ने 4.6 करोड़ की एक फरारी खरीदी थी, जिसको खरीदने के लिए उन्होंने 1.3 करोड़ रुपये खर्च भी किए थे। पर उसे माल्या ने अपनी संपत्ति में ऐड नहीं किया था।

टोजी ने बताया कि कार ऑक्सफोर्ड के अलेक्जेंडर पावेल के नाम पर रजिस्ट्रर्ड है, जिसके लिए मंथली किश्तें 10 लाख की पावेल के एक बैंक अकाउंट से दी गई हैं। जबकि माल्या का कहना है कि ये पेमेंट उन्होंने खुद दिया था। जबकि माल्या के वकील का कहना है कि इसे साबित करने के लिए कोई भी प्रूफ नहीं है। ये भी कहा गया है कि हो सकता है कि ये पेमेंट माल्या के दुबई अकाउंट से दिया गया हो, पर माल्या ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने ब्यौरे में इसका कोई जिक्र नहीं किया था।

माल्या के वकील पिकाक का कहना है कि लंदन की प्रॉपर्टियों में माल्या का कोई अधिकार नहीं है। लदंन में उनकी कॉर्नेवाल टेरेस की प्रॉपर्टी, टेविन होम में उनका बंग्ला है जो उनके पास नहीं है। इस पर उनके बच्चों का अधिकार होगा। माल्या की मां उस पूरे ट्रस्ट की मालकिन हैं। पिकाक का कहना है कि वो अपनी प्रॉपर्टी पर कब्जे के अधिकारी हैं, लेकिन उसके मालिक वो नहीं हैं। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जो बाद में सुनाया जाएगा।

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