जानिए गणपति जी की स्थापना करने के बाद विसर्जन क्यों किया जाता है, क्या है इसकी कहानी

हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार भाद्रपद यानी कि भादो माह की शुक्‍ल पक्ष चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्‍म हुआ था। उनके जन्‍मदिवस को ही गणेश चतुर्थी कहा जाता है।पूरे देश में अनंतचतुर्दशी की धूम है। जगह-जगह ढोल बाजे के साथ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते है कि गणेश चतुर्थी पर गणपतिजी की स्थापना करने के बाद इस दिन उनका विसर्जन क्यों किया जाता है?

शास्त्रों में उल्लेख है कि वेद व्यासजी ने गणेश भगवान जी को महाभारत की कथा गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्थी तक लगातार 10 दिन सुनाई थी। वेद व्यासजी जब यह कथा सुना रहे थे, तब भगवान गणेश अपनी आंखें बंद कर रखी थीं। इस कारण उन्हें पता नहीं चला कि लगातार कथा सुनने का गणेशजी पर क्या असर हो रहा है। जब वेद व्यासजी ने कथा पूरी करने के बाद अपनी आंखे खोलीं तो उन्होंने देखा कि लगातार 10 दिन तक कथा सुनते-सुनते गणेशजी का शरीर तपने लगा है। यानी उन्हें ज्वर हो गया था। इसके बाद वेद व्यासजी तुरंत गणेशजी को पास के कुंड में ले गए और उन्हें वहां डुबकी लगवाई ताकि उनका तापमान सामान्य हो सके।

इसीलिए कहा जाता है कि गणेशजी 10 दिन धरती पर रहते हैं और फिर अनंत चतुर्दशी के दिन कैलाश पर्वत पर चले जाते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार, वास्तव में सारी सृष्टि की उत्पत्ति जल से हुई है। जल बुद्धि का प्रतीक है और गणेशजी बुद्धि के अधिपति हैं। गणेशजी की प्रतिमाएं नदियों की मिट्टी से बनती हैं। इसलिए अंतर चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की प्रतिमाओं को जल में विसर्जित कर देते हैं, क्योंकि वे मिट्टी से बने हैं और जल ही में भगवान गणपति का निवास स्थान है।

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