जी हां ! 17 साल तक जासूस रहे पुतिन, चौथे बार बने रूस के राष्ट्रपति

पुतिन ने चुनाव से ठीक पहले एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया कि उनके बाबा स्पिरिडॉन पुतिन मार्क्सवादी नेता व्लादिमीर लेनिन और जोसेप स्टालिन के रसोइए थे। पुतिन बताते हैं कि उनके पिताजी भी कभी-कभी स्टालिन के घर जाते थे और आकर बताते थे कि वो लोग कैसे रहते हैं।

व्लादिमीर पुतिन चौथे बार रूस के राष्ट्रपति चुने गए। सबसे दिलचस्प बात यह है उनको 76 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके विपक्ष में खड़े दूसरे उम्मीदवारों को मात्र 12 फीसदी वोट ही मिले। रूस में सारी शक्तियां राष्ट्रपति के पास होती है और उसे ही प्रधानमंत्री की नियुक्त का अधिकार है।

लोगों को शायद यह पता नहीं होगा कि पुतिन सोवियत संघ के दौर में वहां की खुफिया एजेंसी केजीबी में 17 साल जासूस भी रहे हैं। पुतिन को उनकी ही मजबूत पर्सनालिटी का भी फायदा मिलता है। वे अपनी स्पीच में जनता को यकीन दिलाते हैं कि उनका मकसद रूस को सोवियत यूनियन की तरह शक्तिशाली बनाना है।

पुतिन ने चुनाव से ठीक पहले एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा किया कि उनके बाबा स्पिरिडॉन पुतिन मार्क्सवादी नेता व्लादिमीर लेनिन और जोसेप स्टालिन के रसोइए थे। पुतिन बताते हैं कि उनके पिताजी भी कभी-कभी स्टालिन के घर जाते थे और आकर बताते थे कि वो लोग कैसे रहते हैं।

पुतिन 2000 से लगातार रूसी सत्ता के केंद्र में बने हैं। 2000 और 2004 में राष्ट्रपति बने। रूस में कोई लगातार दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं रह सकता। इसलिए 2008 में सहयोगी मदवेदेव को राष्ट्रपति बनवाकर खुद प्रधानमंत्री बने। 2012 में पुतिन फिर राष्ट्रपति बने और राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 से बढ़ाकर 6 साल करा दिया।

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