ये 5 शॉर्ट फिल्म जरूर देखें, दिल दहला देने वाली है कहानी

 कई फिल्में जहां काफी लंबी होती हैं तो वहीं कुछ फिल्मों की रनिंग टाइम काफी कम होती है। वैसे औसत रनिंग टाइम की बात करें तो ज्यादातर फिल्में सवा दो घंटे से ढाई घंटे के बीच होती हैं। हालांकि बॉलीवुड में ही कुछ ऐसी फिल्में भी बनी हैं, जो महज डेढ़ घंटे या उससे भी कम टाइम की हैं।

इनमें ‘रागिनी MMS’ से लेकर ‘निल बटे सन्नाट’ जैसी फिल्में हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं बॉलीवुड की अब तक की सभी शॉर्टेस्ट फिल्मों के बारे में जिन्होंने कम समय में दर्शकों के दिल पर दस्तक दी।

 रागिनी एमएमएस एक हॉरर् फिल्म है। जिसमें  कैनाज़ मोतीवाला ने रागिनी और राजकुमार राव ने उदय का किरदार निभाया है। यह एक गहरे जंगल के बहुत अन्दर बने एक सुनसान घर की कहानी है। 2011 में आई रागिनि एमएमस 1 घंटा 33 मिनट की फिल्म है जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था।

 

‘मसान’ से पहचान पाने वाली अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी की फिल्म हरामखोर काफी हिट फिल्म रही। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की ये फिल्म ‘महज 1 घंटा 33 मिनट की है। इस फिल्म ने ‘लॉस ऐंजिलिस फिल्म फेस्टिवल इंडिया कैटेगिरी’ में अवॉर्ड हासिल करने के साथ कई और फेस्टिवल में अवॉर्ड जीते। न्यू यॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी को बेस्ट ऐक्टर का अवॉर्ड मिला तो श्वेता त्रिपाठी को भी बेस्ट ऐक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला।

निर्देशक अजय बहल ने फिल्म ‘बी.ए. पास’ के जरिये समाज को दर्शाया है। समाज जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है। बंद दरवाजे के पीछे शराफत के नकाब उतर जाते हैं। सेक्स और अपराध के तड़के के साथ उन्होंने अपनी बात एक थ्रिलर मूवी की तरह पेश की है।

 

फिल्म का नायक मुकेश (शादाब कमल) बीए फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है। मुकेश बीए करना उसकी मजबूरी पैसे हैं। मुकेश के फुफा के बॉस की पत्नी सारिका (शिल्पा) की नजर मुकेश पर है। बॉस की पत्नी घर का काम करवाने केबबहाने बुलाकर अपनी और दूसरी औरतों की रोमांस और सेक्स की जरूरत को पूरा करवाती है। बस 1 घंटा 33 मिनट की इस फिल्म को काफी पसंद किया गया है।

 

स्वरा भास्कर की फिल्म निल बटे सन्नाटा काफी  हिट फिल्म रही है। फिल्म को काफी सराहना मिली है। 1 घंटा 44 मिनट की फिल्म ‘निल बटे सन्नाटा’ में स्वार बाई बनी हैं। चंदा के रोल को उन्होंने जिया है। उनकी बेटी अपेक्षा के रोल में रिया शुक्ला एकदम फिट नजर आती हैं।

 

कॉमिकल और इंस्पिरेशनल आईएम कलाम दिल को छू लेने वाले एक ऐसे गरीब बच्चे की कहानी है जो पढ़ना चाहता है। बहुत की संवेदनशील तरीके से निर्देशित ये फिल्म बिना किसी मेलोड्रामा के बच्चों को एजुकेशन की महत्व के बारे में मैसेज देती है। हर्ष मयार छोटू के किरदार में है जो अनपढ़ और समझदार बच्चा है। छोटू की मां उसे राजस्थान के एक छोटे से शहर के एक ढाबे पर छोड़ती है, जहां छोटू काम करता है। 1 घंटा 27 मिनट की यह फिल्म आपको सोचने को मजबूर कर देगी।

 

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