क्या मोदी सरकार ने बढ़ा दी है किसानों की मुसीबतें?

अपनी कई मांगों को लेकर महाराष्ट्र के किसान 5 मार्च से ही पैदल यात्रा करके मुंबई के तरफ कूच करने लगे थे। इन किसानों ने महाराष्ट्र के सेंट्रल नासिक से पैदल यात्रा शुरु कर दी थी। कर्ज को लेकर सबसे ज़्यादा त्रस्त महारा।ट्र के किसानों को कई दिनों के बाद ये सबसे बड़ा आंदोलन है। नासिक से मुंबई पहुंचने में इन्हें करीब 1 सप्ताह लग गया। प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या करीब 30,000 है।

अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले ये किसान आज कभी भी विधानसभा के सामने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर सकते हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अभी कुछ दिनों पहले ही राज्य बजट में किसानों के करीब 4000 करोड़ रुपये कर्ज माफी की घोषणा की थी। किसान और उनके समूहों का आरोप है कि सरकार कॉरोपोरेट्स के लिए काम कर रही है, किसानों के लिए नहीं।

किसानों की मांग

ऐसे तो राज्य सरकार ने किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की है, पर किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने इसे सही तौर पर लागू नहीं किया है। जब सही तौर पर लागू नहीं किया है तो फिर किसानों तक ये फायदा कैसे पहुंच सकता है। सबसे बड़ी बात ये है कि किसानों ने जो कर्ज माफी की है वो बैंक के कर्ज़ हैं, जबकि ज़्यादातार किसानों ने साहूकारों से कर्ज़ ले रखा है। ग्रामीण बैंकों से मिलने वाला कर्ज भी किसानों को आसानी से नहीं मिलता है। इस वजह से किसानों को साहूकारों से कर्ज़ लोना पड़ता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य

केंद्र सरकार पिछले अपने लगभग सारे बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की तो है, पर इसका फायदा किसानों तक पहुंच नहीं पा रहा है। किसानों को बहुत ही कम कीमत में अनाज बेचना हो रहा है। स्वानाथन आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि  न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते समय कीटनाशकों, बीज, उर्वरक पर खर्च, परिवार के लोगों के लिए मज़दूरी इत्यादि जैसी चीज़ों पर गौर किया जाए। लेकिन सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करते समय कीटनाशकों, बीज, उर्वरक पर खर्च का ही ख्याल रखा, जिससे कि किसानों को नुकसान पहुंच रहा है।  

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