आखिर करुणानिधि को मरीना बीच पर ही क्यों दफनाना चाहती है डीएमके?

करुणानिधि की मौत के बाद मरीना बीच पर उनकी समाधि बनाने को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब उनका अंतिम संस्कार मरीना बीच पर ही किया जाएगा। उनकी समाधि उनके गुरु अन्नादुरई के बगल में बनाई जाएगी।

इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने मरीना बीच पर उनकी समाधि बनाने से मना कर दिया। प्रदेश सरकार ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए इससे मना कर दिया था। डीएमके की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया जिसके बाद मरीना बीच पर उनके अंतिम संस्कार करने का रास्ता साफ हो गया। अब सवाल ये उठता है कि डीएके आखिर मरीना बीच पर ही करुणानिधि की समाधि क्यों बनाना चाहती है।

ये है वजह 

– मरीना बीच पर तमिलनाडु के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की समाधि है जिनमें जयललिता और एमजी रामचंद्रन तथा सीएन अन्नादुरई की समाधि शामिल है।

– 2016 में जयललिता के निधन के बाद जब उनका अंतिम संस्कार किया गया था तब कोर्ट ने वॉटर फ्रंट से 500 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण पर रोक लगा रखी थी। बाद में जयललिता को उनके गुरु रहे एमजी रामचंद्रन के मेमोरियल में ही दफनाया गया था।

– डीएमके चाहती है कि करुणानिधि को भी वही सम्मान मिले जो इन तीन मुख्यमंत्रियों को दिया गया था।

– डीएमके चाहती थी कि करुणानिधि को उनके गुरु अन्नादुरई के बगल में ही दफनाया जाए।

– मद्रास हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान डीएमके ने कहा कि, ‘हम अपने नेता के लिए केवल 6X6 फुट की जमीन चाहते हैं, इसके अलावा हमें और कुछ नहीं चाहिए।’

– कांग्रेस, सीपीएम के अलावा कई विपक्षी दल के नेता भी करुणानिधि को मरीना बीच पर दफनाने के पक्ष मे थे।

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