भारत के इतिहास का महल जहां गर्मी के 50 डिग्री में भी बिना पंखें मिलता है AC वाला मजा

एक इमारत जिसमें 953 खिड़कियां, है न ताज्जुब। यह अनोखी इमारत गुलाबी नगरी जयपुर में है। आज आईबीएन खबर आपको बताने जा रहा इस इमारत से जुड़ी कई खूबियों और खूबसूरती के बारे में, जिन पर इठलाता है जयपुर।
यह आलीशान इमारत ‘हवामहल’ राजस्थान के प्रतीक के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसका निर्माण 1799 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। इसमें बनाए गए अनगिनत हवादार झरोखों के कारण ही इसका नाम हवामहल पड़ा। इसमें हवा का वेंटिलेशन ऐसा है कि भीषण गर्मी में भी बिना पंखे के इसमें सर्दी लगने लगती है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर बस, रेल, हवाई जहाज किसी भी माध्यम से पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से 268 किलोमीटर दूर जयपुर ट्रेन से 5 से 6 घंटे में पहुंचा जा सकता है।महल का निर्माण महाराज ने सिर्फ इसलिये करवाया था, ताकि रानियां व राजकुमारियां खास अवसरों पर निकलने वाले जुलूस और शहर का दीदार कर सकें।
हवामहल के आनंदपोल और चांदपोल नाम के दो दरवाजे हैं। आनंदपोल पर बनी गणेश प्रतिमा के कारण इसे गणेश पोल भी कहते हैं। गुलाबी नगरी का यह गुलाबी गौरव अपनी अद्भुत बनावट के कारण ही आज विश्वविख्यात है।
ऐतिहासिक इमारत हवामहल का निर्माण सवाई प्रताप सिंह (सवाई जय सिंह के पौत्र और सवाई माधो सिंह के पुत्र) ने 1799 में कराया था। श्री लाल चंद उस्ता् इसके वास्तुीकार थे। यह दूर से किसी मुकुट सरीखा दिखता है। 1885 में इमारत कुछ ऐसी दिखती थी।राजस्थानी और मुगल शैलियों के मिले-जुले रूप में बनी यह इमारत जयपुर के ‘बड़ी चौपड़’ चौराहे से चांदी की टकसाल जाने वाले रास्ते पर स्थित है।
मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के लिए प्रसिद्ध हवामहल लाल और गुलाबी सेंड स्टोटन से मिलजुलकर बनाया गया है। इसमें सफेद किनारी के साथ बारीकी से पच्ची्कारी की गई है।यह ऐतिहासिक इमारत पांच मंजिला है, जो पुराने शहर की मुख्य सड़क पर दिखाई देता है। इसकी ऊंचाई 15 मीटर है। इसमें छोटी-बड़ी कुल मिलाकर 953 खिड़कियां हैं।इसमें गुलाबी रंग के अष्ट भुजाकार और बारीकी से मधुमक्खीई के छत्ते के समान बनाई गई सेंड स्टोऊन की खिड़कियां हैं।
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