आजाद मुल्क का गुलाम गांव, पिछले 70 सालों से यहां नहीं मनाया गया 15 अगस्त का जश्न

दुनिया में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है. यह दिन हर व्यक्ति के लिए बहुत ख़ास होता है क्योंकि यही वह दिन है जब भारत को आजदी मिली थी. इस दिन सभी जगहों पर तिरंगे को लहराया जाता है क्योंकि तिरंगा फहराना ही हमारी आजादी का प्रतीक है लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे है जो आज भी पिछड़े वर्ग में जी रहा है और जहाँ पर आज भी तिरंगा नहीं फहराया गया है. जी हाँ, आजादी के इतने वर्ष बीतने के बाद भी एक ऐसा गाँव है जहाँ पर तिरंगा नहीं फहराया गया. आइए बताते हैं उस गाँव के बारे में. जी दरअसल हम बात कर रहे है हरियाणा के रोहनात गाँव की जहाँ आज भी लोग अपने आपको गुलाम माने हुए है और आज भी वहां पर तिरंगे को नहीं फहराया जाता.

यहाँ की आबादी की बात की जाए तो वह कुल 4200 है लेकिन यहाँ पर आज तक आजादी से जुड़ा कोई त्यौहार नहीं मनाया गया है. जी हाँ, यहाँ पर आज तक ना ही गणतंत्र दिवस मनाया गया है और ना ही स्वतंत्रता दिवस.

आप सभी को पता ही होगा कि रोहनात गाँव में अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग जैसा नरसंहार किया था और यहाँ पर जिसने भी 1857 की क्रांति में भाग लिया था उसे मौत की सजा दी गई थी. गाँव में अंग्रेजों ने तोपें चलाई थी जिससे कई लोग मौत के मुँह में चले गये थे. कई ऐसे लोग थे जिनके ऊपर रोलर चलाकर उनकी हत्या कर दी गई थी और इस वजह से कई महिलाओं ने कुएं में कूदकर जान दे दी थी.

यहाँ पर कई ऐसे कार्य हुए थे जो आज भी लोगों का दिल दहला देते है. आज भी गांववालों के दिल में वो दर्द है इसी वजह से यहाँ पर आज तक गुलामी की जंजीर बंधी हुई है और कोई भी खुद को आजाद नहीं मानता है. आपको बता दें कि अब इस गाँव में भी सरकारी पहल की जा चुकी है और गाँव को उन्नति की ओर ले जाने के लिए इस बार गाँव में गणतंत्र दिवस मनाया गया था ओर अब हो सकता है कि यहाँ स्वतंत्रता दिवस भी मनाया

 

 

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