ये हैं भारत के वो 8 किन्नर, जिन्होंने दुनियाभर में बदलकर रख दी किन्नरों की पहचान

हम आपको कुछ फेमस किन्नरों के बारे में बता, जिन्होंने समाज की परवाह किए बगैर एक नया मुकाम हासिल किया है। इतना ही नहीं इन लोगों ने अपनी प्रतिभा के बल पर अलग पहचान बनाई है। तो चलिए आपको इन किन्नरों से मिलवाते हैं।
किन्नर का नाम सुनते ही दिमाग में तरह-तरह की बातें घूमने लगती है। इनका नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक अलग छवि बन जाती है। कुछ लोग इन्हें बहुत ही ओछी नजरों से देखते हैं, तो कुछ उन्हें सम्मान भी देते हैं। सरकार भी देश में किन्नरों का सम्मान बढ़ाने के लिए कई कोशिशों में लगी है।

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

ये हैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी। लक्ष्मी नारायण ने किन्नरों के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें थर्ड जेंडर के रूप में किन्नरों के पहचान दिलाई। किन्नरों को नई पहचान दिलाने का श्रेय इन्हें ही जाता है।

ए रेवती

इन्होंने अपनी किताब के जरिए पहचान बनाई। इनकी लिखी बुक ‘दी त्रुथ अबाउ मी’ को थर्ड जेंडर लिट्रेचर एट दी अमेरिकन कॉलेज ऑफ मदुरई के रूप में शामिल किया गया।

पद्मिनी प्रकाश

पद्मिनी प्रकाश पहली ऐसी किन्नर हैं, जिन्होंने न्यूज एंकरिंग की। तमिलनाडु के लोटस टीवी में वह न्यूज एंकर थी।

शांता खुरई

शांता खुरई पहली ऐसी किन्नर है, जिन्होंने सैलून खोलकर अपनी पहचान बनाई हैं। मणिपुर में इन्होंने सैलून खोला और इससे प्रेरित होकर कई किन्नरों ने सैलून खोल लिया और अब वह किसी पर निर्भर नहीं है।

मानवी बंदोपाध्याय

मानवी बंदोपाध्याय पहली किन्नर प्रिंसिपल हैं। पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर के एक कॉलेज में उन्होंने कई अच्छे बदलाव किए और वह स्टूडेंस के बीच में काफी पॉपुलर हैं।

मधुबाई

मधुबाई पहली ऐसी महिला किन्नर हैं, जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ लड़कर मेयर का चुनाव जीता था। छत्तीसगढ़ की मधुबाई के साथ मेयर बनने के बाद भी भेदभाव होता रहा, लेकिन वह डटी रहीं।

कल्कि सुब्रमण्यम

कल्कि सुब्रमण्यम पहली किन्नर एंटरप्रेन्योर हैं। इन्होंने साहोदरी फाउंडेशन की शुरुआत की, जो भारत में किन्नरों के सशक्तिकरण के लिए काम करता है।

रुद्राणी क्षेत्री

दिल्ली की रुद्राणी क्षेत्री ऐसी किन्नर हैं, जिन्होंने मॉडल के रूप में अपनी पहचान बनाई। प्रोफेशनल मॉडलिंग एजेंसी मित्र ट्रस्ट के साथ मिलकर उन किन्नरों के लिए काम कर रही हैं, जो मॉडलिंग करना चाहते हैं।

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