अपने दम पर कैंसर को मात दे दिया इस महिला ने, डाक्टर बोले- ये चमत्कार है

  • अमेरिका में आखिरी स्टेज के ब्रेस्ट कैंसर से जूझती एक महिला ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली। डॉक्टरों ने ऐलान कर दिया था कि 52 साल की जूडी पर्किन्स कैंसर के चलते तीन महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगी, लेकिन तीन महीने नहीं करीब दो साल गुजर गए हैं और जूडी बिल्कुल फिट हैं। उनकी बॉडी में कैंसर का नामोनिशान तक नहीं है। हालांकि, यूएस रिसर्चर्स के मुताबिक, ये सबकुछ नई थैरेपी के चलते ही संभव हो सका।

    – दो बच्चों की मां जूडी की बॉडी में 2015 में तेजी से कैंसर फैलने लगा और उसके लिवर में टेनिस की बॉल के साइज का ट्यूमर तक हो गया। इसका असर उनकी नर्व्स पर हो रहा था, जिसके चलते उनकी नॉर्मल लाइफ खत्म होने लगी।
    – जूडी ने बताया, मैंने अपनी से जॉब से रिजाइन कर दिया था और मौत की प्लानिंग करने लगी थी। मैंने माउंटेन क्लाइंबिग जैसे सभी काम छोड़ दिए थे जिसे मैंने पहले एन्जॉय करती थी।
    – मेरे पास ऐसी बहुत सी चीजों की लंबी-चौड़ी लिस्ट थी, जिसे मैं अपनी मौत से पहले करना चाहती थी, लेकिन मैं अपनी बीमारी के चलते ये सब नहीं कर पा रही थी।
    – जूडी ने बताया कि नई थैरेपी से ट्रीटमेंट के दो ही हफ्तों में मुझे लगा कि बॉडी में मौजूद ट्यूमर छोटा हो रहा है और मैं बेहतर महसूस करने लगी हूं।
    – ट्रीटमेंट के चलते देखते ही देखते बॉडी से कैंसर का नामोनिशान मिट गया और मैं एक बार फिर नॉर्मल लाइफ की ओर जाने लगी थी।
    – जूडी ने बताया कि उनकी प्रोग्रेस देखकर डॉक्टर्स को भी भरोसा नहीं हो रहा था हालांकि वो बेहद खुश थे। इस केस के बारे में शिकागो में हुई दुनिया की सबसे बड़ी कैंसर कॉन्फ्रेंस में चर्चा हुई और नेचर मेडिसिन जर्नल में पब्लिश भी किया गया।
    – जूडी ने कहा कि मेरे लिए ये किसी जादू के जैसा है और मैं चकित हूं। अब मैं पिछले दो साल से कैंसर फ्री लाइफ जी रही हूं।

    – बता दें, फ्लोरिडा में पेशे से इंजीनियर जूडी में पहली बार 2003 में कैंसर के लक्षण सामने आए। इसके ठीक होने के बाद फिर 2015 में इसने दस्तक दी और इसका रूप बिगड़ता ही चला गया।

    नई थैरेपी से ऐसे हुआ इलाज
    – अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट्स ने जूडी के ट्यूमर की बायोप्सी को एनालाइज किया। इसके बाद उन्होंने 23 फीसदी व्हाइट ब्लड सेल्स की पहचान कर कैंसर पर अटैक करने के लिए तैयार किया।
    – डॉक्टर्स ने कुछ टी-सेल्स को बॉडी से निकाला और इन्हें अरबों की संख्या में डेवलप किया। इसके बाद इन सेल्स को जूडी के इम्यून सिस्टम में इन्जेक्शन के जरिए डाला गया।
    – जहां जूडी को दी गई सात तरह की कीमोथैरेपी भी फेल हो गई थी। वहीं, इस मिरैकल इन्जेक्शन ने जूडी को नई जिंदगी दे दी।
    – ये पहला मौका है जब बॉडी में सेल ट्रांसफर के जरिए ब्रेस्ट कैंसर को जड़ से खत्म किया गया। अब ये थैरेपी पांच साल में और भी मरीजों के लिए मुहैया कराई जाएगी।

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