आखिर क्या है? अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया और बीजेपी पर इसका क्या पड़ेगा असर?

वाईएसआर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी दोनों आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य नहीं दिए जाने की मांग से नाराज है, जिसे लेकर टीडीपी ने नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (एनडीए) छोड़ने का फैसला किया है।

टीडीपी मुखिया चंद्रबाबू नायडू के साथ-साथ वाईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पक्ष में है।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया:
इस प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसद इसका समर्थन करने चाहिए, तभी लोकसभा सचिवालय इसे स्वीकार करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह मोदी सरकार के खिलाफ पहला अविश्वास होगा। संसद की कार्यप्रणाली के तहत, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन वाईएसआर कांग्रेस के फ्लोर लीडर से प्रस्ताव लाने के लिए कहेंगी, जिसे कम से कम 50 सांसदों को खड़े होकर सपॉर्ट करना होगा। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया के लिए यह जरूरी होगा कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले और कोई भी दल कार्यवाही में दखल न दे।

बीजेपर पर क्या असर होगा?
अविश्वास प्रस्ताव आने पर मोदी सरकार पर कोई खतरा नहीं दिख रहा है, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है। लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के पास अकेले 273 सांसद हैं। लोकसभा में फुल बेंच की स्थिति में भी बहुमत के लिए 272 सांसदों का आंकड़ा होना चाहिए। ऐसी स्थिति में बीजेपी अकेले दम पर ही बहुमत साबित कर जाएगी। आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर केंद्र से पहले अपने दो मंत्रियों को हटाने वाली टीडीपी के पास लोकसभा में 16 सांसद हैं। वहीं वाईएसआर के 9 सांसद हैं।

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