भारत का वह जबांज सिपाही जिसे कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान ने बना लिया था बन्दी

दरअसल फायरिंग के दौरान निकलने वाला धुंआ इतनी ऊंचाई पर उस दुर्लभ वातावरण में इंजन में चला गया जो की आग लगने की वजह बना।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता उन बहुत कम आईएएफ पायलटो में से एक हैं जिनका लड़ाकू विमान दुश्मन की धरती पर दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद, वे लौट कर भारत आ पाए।

28 मई 1999 को पाकिस्तानी सेना द्वारा गोली लगने के बाद उन्हें एक हफ्ते के लिए बंदी बना लिया गया था पर अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के दवाब के कारण पाकिस्तान ने उन्हें 4 जून 1999 को रिहा कर दिया। MiG-27 विमान से निकलते समय उनकी रीढ़ की हड्डी में बहुत चोट आयी और बहुत लोगों को लगा कि वे अब सेना में नहीं रह पाएंगे। पर सबको गलत सिद्ध करते हुए नचिकेता आज भी भारतीय वायु सेना में कार्यरत हैं।

साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान 26 साल के नचिकेता आईएएफ दल के नंबर 9 में युद्ध-प्रभावित बटालिक क्षेत्र में सेवारत थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता का काम दुश्मन के ठिकानों पर 17,000 फ़ीट की ऊंचाई से 80 mm रॉकेट से हमला करना था।

27 मई 1999 को नचिकेता अपने लड़ाकू विमान MiG-27 से दुश्मन के इलाकों पर गोलीबारी कर रहे थे। उन्होंने टारगेट सेट कर अपने विमान से 30 mm की तोप फायर की ही थी, कि तभी उनके इंजन में आग लग गयी। इंजन में आग लगना किसी भी पायलट के लिए बुरे सपने के जैसा होता है। दरअसल फायरिंग के दौरान निकलने वाला धुंआ इतनी ऊंचाई पर उस दुर्लभ वातावरण में इंजन में चला गया जो की आग लगने की वजह बना।

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